सागर

आंगनबाडी हड़ताल के 11वें दिन रैली निकालकर किया कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन

सरकार के पास विधायकों के वेतन बढ़ाने का पैसा है आंगनबाडी कार्यकर्ताओं का नहीं ........ रघु ठाकुर

सागर/आंगनबाडी कार्यकर्ता/सहायिका, परियोजना अधिकारी एवं पर्यवेक्षकों की राज्य व्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल संयुक्त मोर्चा के तत्वाधान में 11वें दिन भी जारी रही। हडताल के ग्यारहवे दिन सैकड़ों आंगनबाडी कार्यकर्ताओं ने हड़ताल स्थल तीन मढिया से रैली निकाली जो बस स्टेण्ड, गोपालगंज होती हुई, कलेक्ट्रेट पहुंची जहां मुख्यमंनी के नाम पुनः स्मरण ज्ञापन कलेक्टर को सौपा गया। आंगनबाडी कार्यकर्ता रैली में शंख, झालर, मजीरा, के साथ अपनी मांगों को को बुंलंद कर रही थी। हड़ताल का समर्थन करने आए समाजवादी चिंतक रघु ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार के पास विधायकों के वेतन बडाने का पैसा है लेकिन आंगनबाडी कार्यकर्ताओं/सहायिकाओं का वेतन बडाने का पैसा नहीं है। जब सरकार समान वेतन समान काम पर चलने की बात करती है तो इनसे सभी विभागों का काम क्यों लिया जाता है। सरकार लाडली वहना तो बना रही है लेकिन जो आंगनबाडी कार्यकर्ता मां बनकर महिलाओं की सेवा कर रही है उनके साथ धोखा क्यों ? संयुक्त मोर्चा उपाध्यक्ष, परियोजना अधिकारी विजय जैन ने कहा कि पर्यवेक्षकों का ग्रेड-पे 2400 से 3600 किया जाए नियमित पदोन्नति करके परियोजना अधिकारी बनाया जाए पर्यवेक्षकों की पदोन्नति गत तीस बर्षों से लंबित है। शिवसेना राज्य उपप्रमुख पप्पू तिवारी ने कहा कि आंगनबाडी कार्यकर्ता को सेवानिवृत्त होने पर 5 लाख रूपये, मिनी कार्यकर्ता को 3 लाख एवं सहायिका को 2 लाख रूपये प्रोत्साहन राशि दी जाना चाहिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सेवानिवृत्ति होने पर गुजराज राज्य की तरह ग्रेज्युटी का लाभ दिया जाए जिस तरह असम सरकार ने सेवानिवृत्ति पर आंगनबाडी कार्यकर्ताओं को 6 लाख रूपये कर दिया है। मृत्यु होने पर आंगनबाडी कार्यकर्ता को 5 लाख मिनी को 3 लाख एवं सहायिका को 2 लाख की राहत राशि दी जाए। परियोजना अधिकारी विजय कोरी ने कहा कि प्रदेश में बर्ष 2007 एवं 2010 में व्यापम परीक्षा से संविदा पर्यवेक्षकों की नियुक्ति नियमित पदो के विरूद्ध की गई थी इसके बाद विभाग में संविदा पर्यवेक्षकों की नियुक्ति बंद कर दी गई और 2014 में नियमित पदों पर निरंतर भर्ती की जा रही है महिला बाल विकास में काम करने वाले सभी संविदा कर्मियों को नियमित किया जाए। रैली व हडताल में पर्यवेक्षक उर्मिला सरवैया, सुधीरा श्रीवास्तव, रजनी बारोलिया, कमलेश तिवारी, स्वाति राय, ममता निषाद, मधु सैनी, शिल्पी कोरी, रक्षा तिवारी, अनीता खुजूर, बेलबती लोधी, सुनीला पाठक, मीना, कल्पना, लीला, कल्पना साहू, लता, रचना, पूनम, स्नेहा, नेहा, रीना, शिवांगी सेंगर, भारती लारिया, रश्मि शर्मा, नीरज शुक्ला, रिचा तिवारी, शशि चौबे, लीना घोषी, सरस्वती पटैल, ज्योति चौरसिया, आंगनबाडी कार्यकर्ताओं में प्रतिमा चौहान, ममता द्विवेदी, निधि चौरसिया, दुर्गा लोधी, चन्द्रवती लोधी, सरोज राजपूत, किरण तिवारी, विजय कुशवाहा, हेमराज आलू, राजा जैन, सरोज, सुषमा, जानकी, संगीता, अंजू, प्रीति, ममता, नीलम, शीला, कमला, मनोरमा, लक्ष्मी, राजकुमारी, सुशीला, उर्मिला, आशा, सपना, अल्का, नेहा, अंगूरी, मंजूलता, लक्ष्मी, विशाखा, सबीता, सहोद्रा, बबीता, अर्चना, गिरजा, आरती, अकीला, चांदनी, रोशनी, गुडिया, सीमा, रंजना, जयंती, गायत्री, अंजुम, निशा, सहित जिले भर की की आंगनबाडी कार्यकर्ता/सहायिका सहित परियोजना अधिकारी, सुपरवाइजर शामिल थे।

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