सागर

कहानी सच्ची है

सीमित संसाधनों के बावजूद आधुनिक तकनीक अपनाकर कृषक जीवन सिंह ने कायम की मिसाल



सागर 16 मार्च 2026
विकासखंड बंडा के ग्राम पंचायत धबौली के प्रगतिशील कृषक जीवन सिंह ने सीमित संसाधनों के बावजूद आधुनिक तकनीक अपनाकर सफलता की मिसाल कायम की। जहां वे पहले पारंपरिक सिंचाई पद्धति से खेती करते थे, जिससे पानी की अधिक खपत और लागत बढ़ जाती थी। पानी की कमी के कारण फसल उत्पादन भी अपेक्षित नहीं मिल पाता था। स्थिति को सुधारने के लिए जीवन सिंह ने अपने खेत में स्प्रिंग कलर पाइप (आधुनिक लचीली सिंचाई पाइप) का उपयोग शुरू किया। इस पाइप से पानी का समान वितरण होने लगा, रिसाव कम हुआ और सिंचाई में समय की बचत हुई। पहले जहां एक एकड़ खेत की सिंचाई में कई घंटे लगते थे, अब वही काम कम समय में पूरा होने लगा।

कृषक जीवन सिंह बताते हैं कि इस तकनीक से पानी की बचत हुई, डीजल व बिजली खर्च घटा और फसल की गुणवत्ता में भी सुधार आया। गेहूं और चने की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जिससे उनकी आय बढ़ी। आसपास के किसान भी उनकी सफलता देखकर प्रेरित हुए और नई तकनीक अपनाने लगे। आज जीवन सिंह न केवल आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि अन्य किसानों को भी आधुनिक सिंचाई पद्धतियों के लाभ समझाकर मार्गदर्शन दे रहे हैं। उनकी कहानी बताती है कि सही तकनीक और सकारात्मक सोच से खेती में सफलता पाई जा सकती है।

स्प्रिंकलर, मिनिस्प्रिंकलर एवं ड्रिप से किसानों को सिंचाई में हुई सुविधा,

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना माइक्रोइरिगेशन अंतर्गत कृषकों द्वारा ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल के माध्यम से स्प्रिंकलर, मिनिस्प्रिंकलर एवं ड्रिप क्रय कर अपने खेतों पर लगाकर सिंचाई का रकबा बढ़ाया है। स्प्रिंकलंर, मिनिस्प्रिंकलर एवं ड्रिप से किसानों को सिंचाई में सुविधा हुई है। इनके माध्यम से कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई की जा रही है। सिंचाई के लिए ड्रिप का उपयोग करने से पानी के साथ तरल उर्वरकों को भी दिया जा सकता है। साथ ही खेतों में खरपतवार की समस्या भी कम हो जाती है। किसान भाई ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल पर अपना पंजीयन कराकर योजना का लाभ प्राप्त कर सकते है। पंजीयन के लिए आवश्यक दस्तावेज आधार कार्ड, खाता-खसरा नकल, बैंक पासबुक, सिंचाई स्त्रोत का प्रमाण एवं अजा/अजजा कृषक के लिए जाति प्रमाण–पत्र की आवश्यकता होगी।

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