भोपालसागर

नाबालिग के साथ दुष्कृत्य करने वाले आरोपी को आजीवन सश्रम कारावास एवं अर्थदण्ड

सागर । नाबालिग के साथ दुष्कृत्य करने वाले आरोपी को विशेष न्यायाधीश (पाक्सों एक्ट) एवं तृतीय  अपर-सत्र न्यायाधीष नीलम शुक्ला जिला-सागर की अदालत ने दोषी करार देते हुये भा.द.वि. की धारा-376(2)(एन) भादस के तहत 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं दो हजार रूपये अर्थदण्ड, धारा- लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा-6 के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं दो हजार रूपये अर्थदण्ड, धारा 3(1)(ू)(प) एस.सी./एस.टी. एक्ट में 03 वर्ष का सश्रम कारावास व पांच सौ रूपये का अर्थदण्ड, धारा 3(2)(अ) एस.सी./एस.टी. एक्ट में आजीवन कारावास व दो हजार रूपये का अर्थदण्ड की सजा से दंडित किया है। मामले की पैरवी विषेष लोक अभियोजक श्रीमती रिपा जैन ने की।
घटना का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है सूचनाकर्ता/अभियोक्त्री के दादा ने थाना देवरी में दिनांक 07.07.19 को इस आषय की रिपोर्ट लेख कराई कि दिनांक 05.07.2019 के रात करीब 10ः00 बजे वे सभी लोग खाना खाकर सो गये थे। दिनांक 09.07.19 के सुबह करीब 4ः00 बजे उसकी बड़ी नातिन निस्तार के लिये उठी तो बालिका बिस्तर पर नहीं थी जिसके बारे में सभी को बताया तथा परिवार के सभी लोगों ने बालिका की तलाष आसपास व रिष्तेदारी में की ंिकन्तु कोई पता नहीं चला। किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा बालिका को बहला फुसलाकर भगाकर ले जाने के संबंधम में रिपोर्ट लेख कराई। उक्त रिपोर्ट पर बालिका के संबंध में गुम इंसान क्रमांक 41/2019 लेख की जाकर अज्ञात के विरूद्ध अपराध क्रमांक 314/2019 अंतर्गत धारा 363 भादस के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट लेख की जाकर प्रकरण विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान दिनांक 26.02.21 को बालिका को दस्तयाब किया गया था। बालिका के कथन लेखबद्ध किये गये जिसमें उसके द्वारा अभियुक्त के साथ चिंचोली  नासिक जाना तथा वहां पर मंदिर में शादी करना तथा पति पत्नि की तरह रहना तथा अभियुक्त से उसे एक लड़का पैदा होना बताये जाने के आधार पर प्रकरण में अभियुक्त के विरूद्ध धारा 366, 376(2)(एन) भादस एवं धारा 3/4 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 एवं एस.सी./एस.टी. एक्ट 1989 के अंतर्गत विवेचना उपरांत न्यायालय के समक्ष अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। विचारण के दौरान अभियोजन द्वारा अभियोजन साक्षियों एवं संबंधित दस्तावेजों को प्रमाणित किया गया एवं अभियोजन ने अपना मामला संदेह से परे प्रमाणित किया। जहॉ विचारण उपरांत विशेष न्यायाधीश (पाक्सों एक्ट) एवं तृतीय अपर-सत्र न्यायाधीष नीलम षुक्ला जिला-सागर की न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुये उपर्युक्त सजा से दंडित किया है।

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