सागर

नाबालिग को भगा ले जाकर दुष्कर्म करने वाले आरोपी को 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं अर्थदण्ड

सागर । नाबालिग को भगा ले जाकर दुष्कर्म ़करने वाले आरोपी अजय कुचबंदिया थाना-सुरखी ़को तृतीय अपर-सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पाक्सों एक्ट 2012) नीलम शुक्ला जिला-सागर की अदालत ने दोषी करार देते हुये भा.द.वि. की धारा-376 (3) के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं पॉच हजार रूपये अर्थदण्ड, धारा-366 के तहत 05 वर्ष का सश्रम कारावास एवं एक हजार रूपये अर्थदण्ड, एवं धारा- 5(एल) सहपठित धारा-6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं पॉच हजार रूपये अर्थदण्ड की सजा से दंडित किया है।मामले की पैरवी सहायक जिला अभियोजन अधिकारी श्रीमती रिपा जैन ने की।
घटना का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि षिकायतकर्ता/बालिका के पिता ने थाना सुरखी में रिपोर्ट लेख कराई कि बालिका सुबह करीब 8ः00 बजे निस्तार के लिये गई थी जो लौटकर नहीं आई जिसकी तलाष आस-पड़ोस एवं रिष्तेदारी में करने पर भी उसका कोई पता नहीं चला। अभियुक्त अजय कुचबंदिया द्वारा उसकी बालिका को बहला-फुसलाकर भगाकर ले जाने की शंका व्यक्त की। दिनॉक 14.08.2021 को बालिका के दस्याव होने पर उसके द्वारा बताया गया कि अभियुक्त अजय कुचबंदिया द्वारा उसे शादी का झांसा देकर इंदौर ले जाकर गलत काम किया गया। उक्त रिपोर्ट के आधार पर थाने पर प्रकरण पंजीबद्ध कर मामला विवेचना में लिया गया, विवेचना के दौरान साक्षियों के कथन लेख किये गये, घटना स्थल का नक्शा मौका तैयार किया गया अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्रित कर थाना-सुरखी द्वारा धारा-363,366क, 376, 376(2)(एन), 376(2)(आई) भा.द.वि.  एवं 5एल/6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 का अपराध आरोपी के विरूद्ध दर्ज करते हुये विवेचना उपरांत चालान न्यायालय में पेश किया। अभियोजन द्वारा अभियोजन साक्षियों एवं संबंधित दस्तावेजों को प्रमाणित किया गया एवं अभियोजन ने अपना मामला संदेह से परे प्रमाणित किया । जहॉ विचारण उपरांत तृतीय अपर-सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पाक्सों एक्ट 2012) नीलम शुक्ला जिला-सागर की न्यायालय ने  आरोपी को दोषी करार देते हुये उपरोक्त सजा से दंडित किया है।

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