भोपालसागर

बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम पर संभागीय कार्यशाला का आयोजन

सागर,/ देश के बच्चों को समुचित शिक्षा उपलब्ध हो कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे इसके लिये विभिन्न प्रयास किये जा रहे हैं इसी कड़ी में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू किया गया है। इस अधिनियम के क्रियान्वयन और जागरूकता के लिये शिक्षा विभाग में समय-समय पर कार्य शालाओं का आयोजन किया जाता रहा है। इसी श्रृखंला में संभाग स्तरीय कार्यशाला का आयोजन सागर में किया गया। मध्यप्रदेश बाल संरक्षण आयोग एवं जिला शिक्षा केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में संभाग के जिलों एवं विकासखंडो से जुड़े बी.आर.सी.,बी.ए.सी, एवं अन्य पदाधिकारियों ने भागीदारी की कार्यक्रम की। अध्यक्षता संयुक्त संचालक लोक शिक्षण संभाग सागर डॉ मनीष वर्मा ने की एवं मुख्य अतिथि बाल संरक्षण आयोग के सदस्य औंकार सिंह एवं डॉ निवेदिता शर्मा थी।
कार्यशाला का प्रारंभ जिला परियोजना समन्वयक शिक्षा केन्द्र सागर डॉ गिरीश मिश्रा के स्वागत भाषण से हुआ साथ ही उन्होने कार्यशाला के उद्धेश्य को रेखांकित किया। डॉ मनीष वर्मा संयुक्त संचालक लोक शिक्षण संभाग सागर ने अपने उद्वोधन में कहा विद्यालयों में शतप्रतिशत नामांकन होना चाहिये। अधिनियम की भावना के अनुरूप कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहें, दिव्यांग बच्चों को चिन्हित कर उन्हें शाला तक लाना हैं।
कार्यक्रम में बालसंरक्षण आयोग के सदस्य श्री औंकार सिंह ने सबोधित करते हुए कहा बालसंरक्षण आयोग बच्चों के हित के लियें कार्य करता है। शिक्षा के लिये जो प्रावधान है उन पर ध्यान देना जरूरी है। आपने कुछ उदाहरणों से अपनी बात रखी आर,टी,ई के नियमों का उल्लेख भी किया।
आयोग की सदस्य डॉ निवेदिता शर्मा ने कहा कि आर.टी.ई. एक्ट को अगर सफल बनाना है तो सबको प्रयास करने होगें कोई भी बच्चा ड्राप आऊट न हो पाये ऑगनवाड़ी के प्रयास सराहनीय है।
विषय विशेषज्ञ डॉ प्रवीण गौतम ने आर.टी.ई के प्रावधानों उपबन्धों पर प्रकाश डालते हुए संविधान के विभिन्न अनुच्छेदो का उल्लेख किया। विशेषज्ञ डॉ ए.के.सिंह ने अधिनियम के अन्य प्रावधानों की चर्चा करते हुए कहा इस अधिनियम के बनने में 100 वर्षो का संघर्ष है इसकी एक बड़ी ऐतिहासिक कथा है बिट्रेन में सबसे पहले अनिवार्य शिक्षा की बात हुई थी, पटेल एक्ट के नाम से पहले भी एवं ऐसा कानून बना। शिक्षाविद् ए.पी.मिश्रा ने अपने उद्बोधन में कहा सबसे पहले नींव के पत्थर को संवारना होगा, बच्चें को मजबूत बनाना पड़ेगा, सबको सहयोग करना होगा। महत्वपूर्ण यह है कि अधिकार क्यों चाहिये।
महिला बाल विकास जिला अधिकारी डॉ ब्रजेश त्रिपाठी ने कहा आंगनवाडी केन्द्रो तक बच्चे पहुंचे।, यहॉ समानता का बोध विकसित होता है। समाज का बडा हिस्सा यहॉ विकसित होता है।
इस अवसर पर अध्यक्ष जिला बाल कल्याण समिति सी.पी.शुक्ला, स्वाति श्रीवास्तव जिवोनायल जस्टिस बोर्ड से वंदना तोमर , मंजूलता सिंह सहित शिक्षाविद् उपस्थित थे, कार्यक्रम का संचालन सहायक संचालक लोक शिक्षण डॉ आशुतोष गौस्वामी ने किया, आभार कमलेश चढार ने किया।

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