भोपालसागर

11 सीडीपीओ को कलेक्टर ने दिए नोटिस, पर्यवेक्षक सहायिका एवं कार्यकर्ताओं को काम पर लौटने के आदेश

सागर /महिला बाल विकास विभाग के सीडीपीओ सहायिका, कार्यकर्ता, पर्यवेक्षक बिना लिखित अनुमति के अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित थे। जिससे माताओं एवं बच्चों के पोषण स्वास्थ्य अधिकार तथा जीवन रक्षक एकीकृत बाल विकास सेवा योजना की सेवाऐं विशेषकर माननीय सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के तहत वर्ष में न्यूनतम 300 दिवस पोषण आहार सेवा भी गंभीर रूप से बाधित हो रही है। उक्त कृत्य को देखते हुए कलेक्टर श्री दीपक आर्य ने 11 सीडीपीओ को कारण बताओ नोटिस जारी कर काम पर उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं साथ ही पर्यवेक्षक, सहायक एवं कार्यकर्ता को काम पर लौटने के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर श्री दीपक आर्य ने बताया कि बाल विकास परियोजना अधिकारी श्रीमती साधना तिवारी बंडा, श्रीमती शाशिकांता नायक राहतगढ़, श्रीमती सोनम नामदेव सागर शहरी क्रमांक 1, श्रीमती हिवा खान देवरी, श्री विजय कुमार जैन सागर ग्रामीण क्रमांक 1, श्री विजय सिंह कोरी खुरई, सुश्री रमा खटीक शाहगढ़, श्रीमती शीतल पटेरिया गढ़ाकोटा, श्री अरुण कुमार सिंह जैसीनगर,  श्रीमती सपना यादव प्रभारी बाल विकास परियोजना अधिकारी बीना ग्रामीण एवं श्रीमती उमा राय बीना नवीन जिला सागर अपने पदीय कार्य से दिनांक 15 मार्च से बिना लिखित अनुमति के अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित है। जिससे माताओं एवं बच्चों के पोषण स्वास्थ्य अधिकार तथा जीवन रक्षक एकीकृत बाल विकास सेवा योजना की सेवाऐं विशेषकर माननीय सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के तहत वर्ष में न्यनतम 300 दिवस पोषण आहार सेवा भी गंभीर रूप से बाधित हो रही है। इसके साथ-साथ सर्वोच्च प्राथमिकता की मुख्यमंत्री लाड़ती बहना योजना विभागीय योजना एवं अन्य नियत शासकी दायित्वों में बाधा उत्पन्न की स्थिति निर्मित हो रही है जिस पर मुख्यमंत्री द्वारा 28 मार्च को आयोजित वीडियो कान्फेंसिंग के दौरान नाराजगी व्यक्त की गई है।
उल्लेखनीय है कि संचालनालय महिला एवं बाल विकास, भोपाल के द्वारा निर्देश जारी किये गए थे कि वित्तीय वर्ष 2022-23 समाप्ति में 03 सप्ताह शेष है इसलिये वित्तीय लक्ष्यों की पूर्ति प्रभावित न हो तथा विधानसभा का बजट सत्र जारी होने के कारण किसी भी अधिकारी/कर्मचारी को किसी भी प्रकार अवकाश स्वीकृत न किया जाये यदि कोई अधिकारी/कर्मचारी अवकाश पर प्रस्थान करते है तो संबंधित अधिकारी/कर्मचारी का उक्त अवधि का अवकाश अस्वीकृत कर उन्हें अवैतनिक/डाईजनान करने की कार्यवाही की जाये।
संचालनालय के पत्र क्रमांक 993 दिनांक 17.03.2023 के कार्यवाही विवरण से स्पष्ट है कि हड़ताल की मांगों के संबंध में विभाग द्वारा संज्ञान लेकर समुचित कार्यवाही प्रचलन में है जिससे आपका हड़ताल पर जाने का औचित्य समाप्त हो जाता हैं परंतु आपके द्वारा उपरोक्त निराकरण कार्यवाही के बाद भी 15 मार्च से  अपनी मांगो को लेकर अवकाश पर होते हुए आज दिनांक तक कार्य पर उपस्थिति नहीं दी गई है। साथ ही अपने अधीनस्थ अमले पर्यवेक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को सार्वजनिक समर्थन में हडृताल पर रहने हेतु प्रेरित किया जा रहा है जो कि शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने की श्रेणी में आता है। आपके एवं पर्यवेक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं के हड़ताल पर होने से बच्चों, माताओं को नियमित पूरक पोषण आहार एवं आईसीडीएस योजनांतर्गत दी जाने वाली अति आवश्यक सेवाऐं प्रभावित हो रही है।
उक्तानुसार उनका यह कृत्य सिविल सर्विस सेवा नियमों के अंतर्गत आपके द्वारा पदीय कर्तव्यों के पालन में गंभीर लापरवाही, शासकीय दायित्वों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के प्रति उदासीनता व स्वेच्छाचारिता को प्रदर्शित करता है जो सिविल सेवा आचरण(आचरण) 1965 के नियम 03 के प्रतिकूल होने से कदाचार की श्रेणी में आता है जो कि दण्डनीय है।
अतः सभी को चेतावनी सहित आदेशित किया जाता है कि तत्काल अपने कार्य पर उपस्थिति देकर अधीनस्थ पर्यवेक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को कार्यपर उपस्थित कराते हुए विधिवत आंगनबाड़ी केन्द्र संचालन तथा मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना सहित समस्त विभागीय व अन्य सौंपे गए शासकीय का सफल संपादन सुनिश्चित करें अन्यथा संचालनालय मबावि के पत्र क्र.889 दिनांक 14.03.2023 एवं मुख्यमंत्री के 28 मार्च के वीसी निर्देशानुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जावेगी।
क्रमांक 552/1670/2023

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