सागर

सागर जिले में प्रदूषण थामने और फसल अवशेष प्रबंधन के लिए प्रशासन सख्त

कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के निर्देश: बिना एसएमएस वाले हार्वेस्टर संचालकों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई

धान एवं खरीफ फसलों की कटाई के समय हार्वेस्टर में एसएमएस लगाना अनिवार्य, नहीं तो होगी कड़ी कार्रवाई
सागर /
धान एवं खरीफ की कटाई के दौरान खेतों में आग लगने की घटनाओं पर अंकुश लगाने और प्रभावी नरवाई प्रबंधन के लिए सागर जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के स्पष्ट निर्देशों के तहत, जिले में संचालित होने वाले सभी कम्बाइन हार्वेस्टर में एसएमएस (स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम) का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि नियमों की अनदेखी करने वाले हार्वेस्टर संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

कृषि विभाग के जानकारों के मुताबिक, एसएमएस तकनीक से लैस हार्वेस्टर फसल की कटाई के साथ-साथ बचे हुए अवशेषों (पराली) को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में एकसार फैला देता है। इससे पराली का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन हो जाता है और समय के साथ खेत की मिट्टी की उपजाऊ क्षमता भी बढ़ जाती है।

सागर जिले में नरवाई जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित, लगेगा भारी जुर्माना

फसल अवशेषों या पराली को आग के हवाले करना एक दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियमों का हवाला देते हुए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्रीमती प्रतिभा पाल ने जिले में इसके सख्त पालन के आदेश जारी किए हैं। स्थिति पर नजर रखने और नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारियों की देखरेख में विशेष समितियों का गठन किया गया है।

नियमों का उल्लंघन करने पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में निम्नलिखित जुर्माना वसूला जाएगा:

2 एकड़ से कम जमीन वाले किसान: ₹2,500 प्रति घटना
2 से 5 एकड़ तक जमीन वाले किसान: ₹5,000 प्रति घटना
5 एकड़ से अधिक जमीन वाले किसान: ₹15,000 प्रति घटना

खेतों में आग लगाने से मिट्टी की उर्वरता और नमी पर पड़ता है बुरा असर

जिला प्रशासन द्वारा सागर जिले के अन्नदाताओं से विशेष अपील की गई है कि वे खेतों में पराली या नरवाई न जलाएं। फसल अवशेष जलाने से न केवल पर्यावरण प्रदूषित होता है, बल्कि मिट्टी के भीतर मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव और मित्र कीट भी नष्ट हो जाते हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि आग लगने से भूमि में अम्लीयता बढ़ती है, जिससे मृदा की सेहत बिगड़ती है और खेतों की पानी रोकने की प्राकृतिक क्षमता (जलधारण क्षमता) पर भी गहरा आघात पहुंचता है।

     क्रमांक 326/3151/2026     फोटो X

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