देवी पंडाल के पास रास्ता मांगने पर युवक की सामूहिक पिटाई, डायल-112 को सूचना के बाद भी कार्रवाई पर सवाल

राहुल सोनी और अन्य 5 लोगों पर मारपीट, अश्लील गाली-गलौज और धमकी देने के आरोप, घायल अनुराग रावत ने कोतवाली में FIR दर्ज कर कार्रवाई की मांग की, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
टीकमगढ़ :- टीकमगढ़ शहर में देवी पंडाल के नाम पर सार्वजनिक रास्ते पर अवरोध और उसके बाद राहगीर के साथ सामूहिक मारपीट का मामला सामने आया है। जवाहर चौक और राजमहल के बीच देवी पंडाल के पास रास्ता मांगने पर अनुराग नामक युवक के साथ मारपीट किए जाने का आरोप है। पीड़ित ने राहुल सोनी और उसके साथ मौजूद करीब 5 लोगों पर गाली-गलौज, बेरहमी से मारपीट और जान से मारने जैसी धमकी देने का आरोप लगाते हुए कोतवाली थाना प्रभारी को लिखित शिकायत दी है। मामले में डायल-112 पर सूचना देने के बावजूद तत्काल कार्रवाई नहीं होने के आरोपों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
रास्ता मांगा तो टूट पड़े लोग
शिकायत के अनुसार, 19 अक्टूबर को अनुराग पूजा का सामान लेने जवाहर चौक की ओर जा रहे थे। राजमहल और जवाहर चौक के बीच देवी पंडाल के पास एक टैक्सी रास्ता अवरुद्ध होने के कारण फंसी हुई थी। अनुराग ने पंडाल समिति के सदस्यों से निकलने के लिए रास्ता देने का अनुरोध किया, लेकिन आरोप है कि उन्हें रास्ता नहीं दिया गया। जब उन्होंने नाली के किनारे से निकलने का प्रयास किया, तो राहुल सोनी और उसके साथ मौजूद समिति के करीब 5 सदस्यों ने उनके साथ अभद्रता शुरू कर दी। पीड़ित का आरोप है कि इसके बाद लोगों ने एकजुट होकर उन्हें पीटा और अश्लील गालियां दीं।
आंखों से रक्तस्राव, हाथों में चोट और कानों में दर्द का आरोप
अनुराग रावत ने अपनी शिकायत में दोनों हाथों और आंखों में चोट तथा रक्तस्राव, कानों में अत्यधिक दर्द, सुनने में परेशानी और पीठ सहित शरीर के अन्य हिस्सों में चोट एवं दर्द होने की बात कही है। पीड़ित के मुताबिक, आरोपियों ने पुलिस में शिकायत करने पर दोबारा मारपीट करने की धमकी भी दी। शिकायत में धमकी का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि पंडाल के पास से जितनी बार निकलेंगे, उतनी बार मार खाने की चेतावनी दी गई।
डायल-112 पर सूचना, फिर भी कार्रवाई के बजाय इंतजार
मामले का सबसे गंभीर पहलू पुलिस की शुरुआती प्रतिक्रिया को लेकर लगाए गए आरोप हैं। अनुराग के अनुसार, घटना के तत्काल बाद उन्होंने डायल-112 पर फोन कर पुलिस सहायता मांगी। इसके बाद वह कोतवाली थाने पहुंचे, जहां उन्हें आधा से एक घंटे बाद आने के लिए कहा गया। दर्द से परेशान होने के कारण वह अस्पताल चले गए और दवाएं लीं।
पीड़ित का आरोप है कि बाद में डायल-112 से संबंधित नंबर से फोन आया और बातचीत में उन्हें बताया गया कि लिखित आवेदन के बिना कार्रवाई नहीं की जा सकती। शिकायतकर्ता के अनुसार, बातचीत में पंडाल समिति की पूर्व शिकायत के कारण पुलिस विभाग के एक कर्मचारी को लाइन अटैच किए जाने का भी उल्लेख किया गया।
देवी पंडाल की आड़ में सार्वजनिक रास्ते पर गुंडागर्दी का आरोप
धार्मिक आयोजन आस्था और सामाजिक सद्भाव के प्रतीक होते हैं, लेकिन किसी भी आयोजन की आड़ में आम नागरिकों के रास्ते को बाधित करने, उनके साथ अभद्रता करने या मारपीट करने का अधिकार किसी को नहीं मिल जाता। शिकायत में जिस स्थान का उल्लेख है, वह शहर के व्यस्त मार्गों में शामिल बताया गया है। ऐसे में रास्ते की व्यवस्था, आवागमन की सुविधा और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की जिम्मेदारी है।
यदि पंडाल के कारण रास्ता अवरुद्ध हुआ और रास्ता मांगने पर किसी राहगीर के साथ मारपीट की गई, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई जरूरी है। धार्मिक आयोजन से जुड़े होने का हवाला देकर किसी को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता।
पुलिस पर निष्क्रियता के आरोप आरोप
इस प्रकरण में मारपीट के आरोप जितने गंभीर हैं, उतने ही गंभीर पुलिस की प्रतिक्रिया को लेकर उठे सवाल भी हैं। अपराध की सूचना मिलने पर पुलिस का दायित्व शिकायत सुनना, उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण करना, आवश्यक चिकित्सकीय साक्ष्य जुटाना और कानून के अनुसार कार्रवाई करना है। यदि पीड़ित को सहायता के लिए भटकना पड़ा या उसकी शिकायत पर अनावश्यक देरी हुई, तो इसकी जिम्मेदारी भी पुलिस प्रशासन की है ।
पुलिस प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि डायल-112 पर सूचना मिलने के बाद क्या कदम उठाए गए, घटनास्थल पर पुलिस पहुंची या नहीं और थाने में शिकायतकर्ता को तत्काल सहायता क्यों नहीं मिल सकी। जिस कारण आवेदक को अपना आवेदन डांक द्वारा भेजने के लिए मजबूर होना पड़ा।
FIR, मेडिकल और CCTV जांच की मांग
अनुराग रावत ने थाना प्रभारी को दिए आवेदन में राहुल सोनी तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों की पहचान कर उचित धाराओं में FIR दर्ज करने और वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।
