सागर

*मदद के लिए कोई खास अवसर नहीं होता, यह भावना हमारे संस्कारों में होनी चाहिए: रिशांक तिवारी*

सागर। : श्री जी महारास एवं संकल्प फाउंडेशन द्वारा आयोजित श्री जी महारास गरबा महोत्सव में माँ दुर्गा की आराधना, गरबा की भक्तिमय प्रस्तुतियों और सांस्कृतिक उत्साह के बीच पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया गया। इस अवसर पर संकल्प फाउंडेशन द्वारा लगभग 150 तुलसी के पौधों का वितरण किया गया। वहीं, प्रदेश मीडिया पैनलिस्ट रिशांक तिवारी ने समाज में आपसी सहयोग, सद्भाव, सेवा और मातृशक्ति के सम्मान को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

### तुलसी पौधों के वितरण से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

महोत्सव के दौरान संकल्प फाउंडेशन की ओर से श्रद्धालुओं एवं उपस्थित लोगों को लगभग 150 तुलसी के पौधे वितरित किए गए। इस पहल का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में विशेष स्थान रखने वाली तुलसी के प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करना रहा।

इस अवसर पर रिशांक तिवारी ने लोगों से अपील की कि वे तुलसी के पौधे को अपने घरों में लगाएँ और उसकी नियमित देखभाल कर उसे बड़ा करें। उन्होंने कहा कि तुलसी हमारी आस्था, संस्कृति और परंपराओं का महत्वपूर्ण प्रतीक है। पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी देखभाल करना भी हमारी जिम्मेदारी है। छोटे-छोटे प्रयासों से हम अपने आसपास के वातावरण को हरा-भरा बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

### मदद करने के लिए कोई खास अवसर नहीं होता : रिशांक तिवारी

सामाजिक सहयोग और सेवा भावना पर अपने विचार रखते हुए रिशांक तिवारी ने कहा कि किसी की मदद करने के लिए कोई विशेष अवसर नहीं होता। यह भावना हमारे भीतर आत्मसात होनी चाहिए, जिससे हमारी मानसिकता ऐसी बने कि हम सदैव जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे रहें और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएँ।

उन्होंने कहा कि सागर शहर की पहचान संघर्ष, परिश्रम और अनेक परिवारों की कामयाबी से जुड़ी है। शहर की असली ताकत यहाँ के लोगों के आपसी संबंधों, सहयोग और एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता में है। हमारा प्रयास ऐसा समाज बनाने का होना चाहिए, जहाँ हर व्यक्ति दूसरे की परेशानी को समझे और जरूरत पड़ने पर उसकी सहायता के लिए खड़ा रहे।

### सांस्कृतिक आयोजन समाज को एक सूत्र में बाँधते हैं

रिशांक तिवारी ने कहा कि श्री जी महारास गरबा जैसे सांस्कृतिक आयोजन केवल धार्मिक उत्सव नहीं हैं, बल्कि लोगों को आपस में जोड़ने और सामाजिक एकता को मजबूत करने का माध्यम भी हैं। जब बच्चे, युवा और परिवार एक साथ ऐसे आयोजनों में भाग लेते हैं तथा आयोजन की तैयारियों में मिलकर काम करते हैं, तो उनके बीच आपसी सम्मान, अपनापन और परिवार जैसी भावना विकसित होती है।

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए जरूरी है कि लोग एक-दूसरे के प्रति अच्छी भावना रखें और सहयोग की संस्कृति को बढ़ावा दें।

केवल नौ दिन नहीं, पूरे जीवन करें मातृशक्ति का सम्मान

शारदीय नवरात्रि के अवसर पर नारी सम्मान का संदेश देते हुए रिशांक तिवारी ने कहा कि जिस श्रद्धा और भक्ति से हम देवी माँ की आराधना करते हैं, उसी भावना से हमें अपने जीवन में प्रत्येक माता, बहन और महिला का सम्मान करना चाहिए। नारी सम्मान केवल नवरात्रि के नौ दिनों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह हमारे व्यवहार, विचारों और संस्कारों में जीवनभर दिखाई देना चाहिए।

उन्होंने मंच से उपस्थित युवाओं और सभी पुरुषों से आह्वान किया कि वे संकल्प लें कि कभी भी जाने-अनजाने में किसी महिला का अपमान नहीं करेंगे और न ही किसी दूसरे को महिला का अपमान करने देंगे। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति सम्मान, सुरक्षा और समानता की भावना प्रत्येक परिवार और समाज की प्राथमिकता होनी चाहिए।

रिशांक तिवारी ने श्री जी महारास गरबा महोत्सव की पूरी आयोजन टीम और गरबा में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने माँ दुर्गा से सभी के सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना करते हुए कहा कि समाज में वास्तविक बदलाव तभी आएगा, जब हम अपनी आस्था को अच्छे कर्मों, जरूरतमंदों की सहायता, पर्यावरण संरक्षण और मातृशक्ति के सम्मान के रूप में अपने जीवन में उतारेंगे।

श्री जी महारास गरबा महोत्सव के माध्यम से भक्ति, संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया गया।

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