नवरात्रि में नौ दिन मां की आराधना, तो साल के 365 दिन नारी का सम्मान करें : रिशांक तिवारी

सागर। नवरात्रि के पावन पर्व पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया पैनलिस्ट रिशांक तिवारी शहर के विभिन्न दुर्गा पंडालों एवं धार्मिक आयोजनों में सम्मिलित हुए। इस दौरान उन्होंने मोतीनगर चौराहे स्थित श्री दुर्गा अवतार महोत्सव समिति, भगतसिंह वार्ड स्थित श्री हरसिद्धि काली कमेटी एवं धर्मश्री स्थित श्री बालाजी बाल काली कमेटी द्वारा आयोजित विभिन्न महाआरती कार्यक्रमों में सहभागिता कर माता रानी के दर्शन किए। धर्मश्री में उन्होंने कन्या पूजन कर मातृशक्ति के सम्मान का संदेश दिया। इसके पश्चात वे दयानंद वार्ड में मां सरस्वती काली कमेटी द्वारा आयोजित राधे-राधे संकीर्तन में शामिल हुए, जहां उन्होंने भजन गाकर श्रद्धालुओं के साथ भक्तिमय वातावरण में सहभागिता की।
धर्मश्री में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नारी सम्मान पर अपने विचार व्यक्त करते हुए रिशांक तिवारी ने कहा कि आज हमें आत्ममंथन करने की आवश्यकता है कि हम समाज के रूप में किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जब समाज में “एक कचौरी, दो समोसे, इन मर्दों का क्या भरोसा” जैसी बातें सुनने को मिलती हैं, तो यह पूरे पुरुष वर्ग के लिए शर्मिंदगी और चिंतन का विषय है। आखिर हमारे व्यवहार और सोच में ऐसी क्या कमी रह गई है कि महिलाओं के मन में पुरुषों के प्रति अविश्वास की भावना पैदा हो रही है? हमें इस सोच को बदलने के लिए स्वयं आगे आना होगा।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि के नौ दिनों में हम माता रानी की आराधना करते हैं, कन्या पूजन करते हैं और नारी शक्ति के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। लेकिन सच्ची भक्ति तभी सार्थक होगी, जब यही सम्मान हमारे व्यवहार और विचारों में भी दिखाई दे। मां की आराधना नौ दिनों तक ही नहीं, बल्कि नारी का सम्मान साल के 365 दिन होना चाहिए। हर पुरुष की जिम्मेदारी है कि वह अपने आचरण से महिलाओं के प्रति विश्वास, सुरक्षा और सम्मान का वातावरण बनाए।
रिशांक तिवारी ने कहा कि महिलाओं का सम्मान केवल शब्दों और धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसकी शुरुआत अपने घर, परिवार और स्वयं के व्यवहार से करनी होगी। हमें ऐसा समाज बनाना है, जहां हर बेटी सुरक्षित महसूस करे, हर महिला को सम्मान मिले और किसी भी महिला को अपने सम्मान एवं सुरक्षा के लिए संघर्ष न करना पड़े।
उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से मातृशक्ति के सम्मान और सुरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति हमें नारी शक्ति का सम्मान करना सिखाती है। इसलिए जरूरी है कि हम अपने संस्कारों को अपने व्यवहार में उतारें और आने वाली पीढ़ियों को भी महिलाओं के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और समानता की शिक्षा दें।

