गढ़ाकोटा में धूमधाम से निकली मां जगत जननी की विदाई यात्रा, सुनार नदी में हुआ प्रतिमाओं का विसर्जन
नम आंखों से भक्तों ने दी मां दुर्गा को विदाई, नगर के प्रमुख मार्गों से निकली विसर्जन यात्रा; नगर पालिका ने क्रेन मशीन से विसर्जन के लिए की विशेष व्यवस्थाएं

गढ़ाकोटा/सागर। शारदीय नवरात्र पर्व के समापन और दशहरा के अवसर पर सागर जिले के गढ़ाकोटा में मां जगत जननी दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ किया गया। नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना और पूजा-अर्चना में लीन रहे श्रद्धालुओं ने नम आंखों से माता रानी को विदाई दी। नगर में जगह-जगह विराजमान मां दुर्गा की प्रतिमाओं को लेकर समितियों के सदस्य धूमधाम से विसर्जन यात्रा में शामिल हुए। नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए प्रतिमाएं सुनार नदी के बड़े पुल के समीप विसर्जन स्थल पर पहुंचीं, जहां धार्मिक परंपराओं के अनुसार प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।
नगर भ्रमण के बाद सुनार नदी में विसर्जन
शारदीय नवरात्र के दौरान नगर के विभिन्न स्थानों पर आकर्षक पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। नौ दिनों तक पूजा-पाठ, आरती और धार्मिक आयोजनों के बाद दशहरा के अवसर पर माता रानी की विदाई का क्रम शुरू हुआ। प्रतिमा विसर्जन यात्रा में दुर्गा उत्सव समितियों के सदस्य और श्रद्धालु उत्साह के साथ शामिल हुए। नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरती विसर्जन यात्रा के दौरान भक्तों ने मां जगदंबे के जयकारे लगाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। एक ओर माता रानी की विदाई का भावुक क्षण था, तो दूसरी ओर अगले वर्ष मां के पुनः आगमन की प्रतीक्षा और उल्लास भी श्रद्धालुओं के चेहरों पर दिखाई दिया।
नगर पालिका ने की विशेष व्यवस्थाएं
दुर्गा प्रतिमा विसर्जन को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए नगर पालिका द्वारा प्रत्येक वर्ष की परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी सुनार नदी के बड़े पुल के समीप विसर्जन घाट पर विशेष व्यवस्थाएं की गईं। प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए क्रेन मशीन की व्यवस्था की गई, जिससे प्रतिमाओं को सुरक्षित तरीके से नदी में विसर्जित करने में सहयोग मिला। विसर्जन स्थल पर व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए संबंधित अमला भी सक्रिय रहा।
पुलिस और बिजली विभाग ने निभाई जिम्मेदारी
प्रतिमा विसर्जन के दौरान शांति, सुरक्षा और व्यवस्थाओं को बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन तथा बिजली विभाग सहित संबंधित विभागों ने अपनी-अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। सभी के समन्वय से विसर्जन प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने में सहयोग मिला। नवरात्र पर्व के दौरान स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमाओं की विदाई के साथ ही नगर में धार्मिक आयोजनों का समापन हुआ। श्रद्धालुओं ने मां जगत जननी से सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए अगले वर्ष फिर से पधारने की प्रार्थना की।