बाल विवाह की सूचना हेल्पलाइन 181, 1098 और 112 पर देने की अपील
देवउठनी ग्यारस पर बाल विवाह रोकने प्रदेशभर में चलेगा विशेष अभियान
सामूहिक विवाह आयोजनों पर रहेगी विशेष निगरानी, जिला और ब्लॉक स्तर पर बनेंगे 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम
ग्राम और वार्ड स्तर पर सूचना दल, उड़न दस्ते करेंगे विवाह स्थलों का निरीक्षण
भोपाल : /सचिव महिला बाल विकास श्रीमती जीवी रश्मि ने कहा कि प्रदेश में देवउठनी ग्यारस के अवसर पर बाल विवाह की रोकथाम के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर विशेष अभियान चलाया जाएगा। आगामी 20 नवंबर 2026 को देवउठनी ग्यारस पर बड़ी संख्या में होने वाले सामूहिक विवाह आयोजनों को देखते हुए विभाग ने सभी जिलों को विशेष सतर्कता बरतने और बाल विवाह की रोकथाम के लिए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अभियान के अंतर्गत ग्राम एवं वार्ड स्तर पर सूचना दल गठित किए जाएंगे, वहीं जिला और ब्लॉक स्तर पर 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम तथा उड़न दस्तों के माध्यम से विवाह आयोजनों की निगरानी की जाएगी।
सचिव श्रीमती रश्मि ने महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा भारत सरकार के बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत प्रदेश में बाल विवाह की घटनाओं को शून्य करने के उद्देश्य से जनजागरूकता और निगरानी गतिविधियों को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से बाल विवाह की दृष्टि से संवेदनशील जिलों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अभियान संचालित किया जाएगा।
पंचायतों में ली जाएगी बाल विवाह रोकने की शपथ
देवउठनी ग्यारस के अवसर पर 20 नवंबर को सभी ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में पंच, सरपंच, पंचायत सचिव, अध्यक्ष एवं पार्षद बाल विवाह नहीं होने देने की शपथ लेंगे। शपथ पत्र पंचायत एवं वार्ड कार्यालयों में प्रदर्शित किए जाएंगे। विवाह मुहूर्त से कम से कम एक सप्ताह पूर्व स्कूलों एवं आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से जागरूकता रैलियां निकाली जाएंगी। शासकीय स्कूलों और महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को बाल विवाह के दुष्परिणामों तथा शिकायत के लिए उपलब्ध हेल्पलाइन की जानकारी दी जाएगी। स्वसहायता समूहों की महिलाएं गांवों में सामूहिक चर्चा कर परिवारों को बाल विवाह नहीं करने के लिए प्रेरित करेंगी।
संवेदनशील परिवारों की पहचान कर दी जाएगी समझाइश
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, ग्राम कोटवारों और पंचायत सचिवों के सहयोग से 18 वर्ष से कम आयु की अविवाहित किशोरियों की जानकारी संकलित की जाएगी। यह जानकारी जिला पुलिस अधीक्षकों एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को उपलब्ध कराई जाएगी। संबंधित परिवारों को बाल विवाह के कानूनी प्रावधानों और दुष्परिणामों की जानकारी देकर समझाइश दी जाएगी तथा संभावित बाल विवाह रोकने के लिए विशेष निगरानी रखी जाएगी।
सूचना दल और उड़न दस्ते रखेंगे विवाह आयोजनों पर नजर
प्रत्येक ग्राम एवं वार्ड में शिक्षकों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वसहायता समूहों, शौर्य दल, पंचायत प्रतिनिधियों और सक्रिय नागरिकों को शामिल कर सूचना दल गठित किए जाएंगे। ये दल विवाह आयोजनों की जानकारी रखेंगे और बाल विवाह की आशंका होने पर तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचित करेंगे। जिला एवं ब्लॉक स्तर पर स्थापित कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे सक्रिय रहेंगे। बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों के नेतृत्व में गठित उड़न दस्ते सामूहिक विवाह स्थलों का निरीक्षण करेंगे। बाल विवाह पाए जाने पर बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।
बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण
विभाग द्वारा 6 अक्टूबर 2026 को आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में प्रशिक्षित अधिकारियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में उपयोग करते हुए जिला स्तर पर प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें राजस्व, पुलिस, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के बीच समन्वय को मजबूत किया जाएगा।
हेल्पलाइन और सोशल मीडिया से चलेगा जागरूकता
बाल विवाह की रोकथाम के लिए स्थानीय मीडिया, सोशल मीडिया, व्हाट्सएप समूहों और दीवार लेखन के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। विवाह आयोजनों से जुड़े धर्मगुरुओं, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों का भी सहयोग लिया जाएगा। आम नागरिक बाल विवाह की सूचना हेल्पलाइन 181, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, आपातकालीन सेवा 112 अथवा स्थानीय कंट्रोल रूम में दे सकेंगे। इसके अतिरिक्त बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की जा सकेगी। विभाग ने सभी जिलों को अभियान के अंतर्गत आयोजित जनजागरूकता गतिविधियों और रोके गए बाल विवाह के प्रकरणों की जानकारी पोर्टल पर दर्ज करने तथा देवउठनी ग्यारस पर की गई कार्रवाई का प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए है ।
