सागर

बण्डा एवं शाहगढ़ के हार्वेस्टर संचालकों की बैठक आयोजित

नरवाई प्रबंधन के लिए हार्वेस्टर में SMS लगाना अनिवार्य, संचालकों को दिए निर्देश

अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्री संजय कुमार जैन की अध्यक्षता में एसडीएम कार्यालय बण्डा में बण्डा एवं शाहगढ़ क्षेत्र के कम्बाइन हार्वेस्टर संचालकों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में फसल कटाई के दौरान नरवाई प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण तथा कम्बाइन हार्वेस्टर में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) के उपयोग को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।बैठक में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री यू.एस. अहिरवार ने हार्वेस्टर संचालकों को एसएमएस सिस्टम की उपयोगिता एवं आवश्यकता की जानकारी देते हुए बताया कि यह कम्बाइन हार्वेस्टर में लगाया जाने वाला विशेष उपकरण है, जो फसल कटाई के दौरान खेत में बचने वाले डंठल एवं भूसे को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर पूरे खेत में समान रूप से फैला देता है। इससे फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन होता है और नरवाई जलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।उन्होंने बताया कि नरवाई जलाने से भूमि की ऊपरी सतह का तापमान बढ़ता है, मिट्टी में मौजूद लाभदायक सूक्ष्मजीव नष्ट होते हैं तथा भूमि की जैविक गुणवत्ता एवं उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। इसके अतिरिक्त वायु प्रदूषण बढ़ने से मानव एवं पशुओं के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।श्री अहिरवार ने एसएमएस के लाभ बताते हुए कहा कि फसल अवशेष खेत में ही सड़कर जैविक पदार्थ बढ़ाने में सहायक होते हैं। इससे मिट्टी में नमी का संरक्षण, भूमि की संरचना में सुधार तथा दीर्घकालीन मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद मिलती है। साथ ही सुपर सीडर एवं हैप्पी सीडर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों से अगली फसल की बुवाई भी सुविधाजनक हो जाती है।बैठक में शासन के निर्देशों की जानकारी देते हुए हार्वेस्टर संचालकों को बताया गया कि कम्बाइन हार्वेस्टर में एसएमएस अथवा संबंधित निर्देशों में निर्धारित फसल अवशेष प्रबंधन व्यवस्था का उपयोग सुनिश्चित करें। बिना निर्धारित व्यवस्था के हार्वेस्टर संचालन करने पर संबंधित जिला प्रशासन के आदेशों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा पात्र किसानों को सुपर एसएमएस की खरीदी पर 50 प्रतिशत तक अनुदान तथा अधिकतम 59,700 रुपये तक सहायता का प्रावधान है।एसडीएम श्री संजय कुमार जैन ने हार्वेस्टर संचालकों से शासन के निर्देशों का पालन करने तथा किसानों को नरवाई प्रबंधन के प्रति जागरूक करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नरवाई जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने, कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति सुरक्षित रखने और पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी की सहभागिता आवश्यक है। बैठक में हार्वेस्टर संचालकों से आधुनिक तकनीक अपनाकर नरवाई प्रबंधन में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने की अपील की गई।

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